मैं अनपढ़ क्या कर सकता हूँ-
दीये की तरह जल सकता हूँ ,
रौशनी ओरों के लिए -
अंधेरो में रह सकता हूँ ,
मैं अनपढ़ क्या कर सकता हूँ |
लोगों के लिए ,मैं हँसी-
सपनो में जी सकता हूँ ,
मैं अनपढ़ क्या कर सकता हूँ-
ओरों के लिए मेरे कंधे-
अपनी अर्थी-
ख़ुद उठा सकता हूँ ,
मैं अनपढ़ क्या कर सकता हूँ-
1 comment:
.. बहुत सुंदर ...
पढने लिखने का सारा गुरूर जाता गया
एक अनपढ़ ऐसी बात समझा गया
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