Monday, June 8, 2009

किट्टू


किट्टू

हरे-भरे डाल में चीं- चीं करती किट्टू गोरैया आज सपने देखने लगी है | उसे किसी चिडे की तलाश है ; जो उसको हमेसा खुश रखेगा | वह झूलती शाखों में सपनो का पुल बाधने लगी है |
किट्टू का एक भरा-पुरा परिवार है, जिसमें- पापा-मम्मी के अलावा तीन भाई-बहन है| हाँ ! और साथ ही- दादा-दादी , चाचा-चची, मोसा -मोसी भी रहते हैं | इनमे कोई छोटा तो कोई मोटा, कुछ काले, कुछ उलझे-उलझे, कुछ सहमे-सहमे से लोग भी साथ रहते हैं | इन सभी को किट्टू की बहुत फ़िक्र लगी रहती है |
टुनटुन मोसी तो हमेशा ही किट्टू की रिश्ते की बात करती है | वह आई नहीं की, चिडो की लिस्ट ही थमा देती है | वह कहती है ," चीं- चीं, लड़की अब बड़ी हो गयी है | अब इसे घर बैठा कर रखना अच्छी बात नहीं |"
अब भला किट्टू इन बातों को सुनकर कैसे उदास न होगी | वह हमेशा टुनटुन मोसी के आने पर उदास हो जाती है | अपनी उदासी को लिए, किसी से कुछ कहे बिना, वह गाँव के पास नीम के पेढ़ में जा बैठती | किट्टू सारा वक्त वहीँ बिताती, और अपने सपनो को जवा करती रहती |
एक दिन किट्टू नीम के उसी पेढ़ में उदास बैठी थी, तो अचानक दूर देश से एक गोरैया वहाँ आकर डाल पर बैठ गया | वह किट्टू को देखे बिना ही, चीं-चीं करते हुए गाना गाने लगा | उसकी आवाज़ किट्टू को भा जाती है |वह आँख बाँध करके उसके गाने को सुनने लगी |तभी गोरैया गाना, गाना बंद कर देता है |और किट्टू को देख शरमा जाता है | गाना बंद होते ही किट्टू की आँख खुल जाती है | ये देख चिडा कहता है ," चीं-चीं, माफ़ कीजियेगा ! मैंने आपको नींद से जगा दिया |
किट्टू बड़े ही अदब से कहती है, " नहीं, नहीं ! आप ऐसे मत सोचिए | मैं तो आपका गाना सुन रही थी | बहुत सुरीली आवाज़ है आपकी ........|"
इतने में किट्टू को पीछे से किसी के बुलाने की आवाज़ सुनाई दी| उसने मूढ़ कर देखा तो उसकी बहन उसे घर चलने के लिए बोल रही थी | वह चिडे को बिना कुछ कहे वहाँ से चली जाती है |
यहाँ नीम के पेढ़ में बैठा चिडा, किट्टू को दूर तक उड़ते देखता रहता है और फिर अपने आप में खो जाता है |
दुसरे दिन जब किट्टू नीम के पेढ़ पर दुबारा आती है तो, वह देखती है कि अभी तक कल वाला चिडा उसी डाल पर बैठा हुआ है | वह हैरान रहा जाती है | और चिडे से कहती है, " अरे ! आप अभी तक यहीं पर है ? घर नहीं गाये क्या ?
चिडा बोलता है , " मैं तो हमेशा से ही यहाँ रहता हूँ | तुमने शायद कभी गौर नहीं किया |
to be continue......................Manoj Prasad

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