मेरे और तुम्हारे बीच , है एक रिश्ता ! वो है जीवन का, सांसो में बहने वाले प्राणों का, है रिश्ता तुम्हारे और मेरे बीच, ज़िन्दगी से लड़ने का .....
Monday, June 29, 2009
मेरे और तुम्हारे बीच
मेरे और तुम्हारे बीच , है एक रिश्ता ! वो है जीवन का, सांसो में बहने वाले प्राणों का, है रिश्ता तुम्हारे और मेरे बीच, ज़िन्दगी से लड़ने का .....
Tuesday, June 9, 2009
मैं अनपढ़
मैं अनपढ़ क्या कर सकता हूँ-
दीये की तरह जल सकता हूँ ,
रौशनी ओरों के लिए -
अंधेरो में रह सकता हूँ ,
मैं अनपढ़ क्या कर सकता हूँ |
लोगों के लिए ,मैं हँसी-
सपनो में जी सकता हूँ ,
मैं अनपढ़ क्या कर सकता हूँ-
ओरों के लिए मेरे कंधे-
अपनी अर्थी-
ख़ुद उठा सकता हूँ ,
मैं अनपढ़ क्या कर सकता हूँ-
दीये की तरह जल सकता हूँ ,
रौशनी ओरों के लिए -
अंधेरो में रह सकता हूँ ,
मैं अनपढ़ क्या कर सकता हूँ |
लोगों के लिए ,मैं हँसी-
सपनो में जी सकता हूँ ,
मैं अनपढ़ क्या कर सकता हूँ-
ओरों के लिए मेरे कंधे-
अपनी अर्थी-
ख़ुद उठा सकता हूँ ,
मैं अनपढ़ क्या कर सकता हूँ-
Monday, June 8, 2009
किट्टू
किट्टू
हरे-भरे डाल में चीं- चीं करती किट्टू गोरैया आज सपने देखने लगी है | उसे किसी चिडे की तलाश है ; जो उसको हमेसा खुश रखेगा | वह झूलती शाखों में सपनो का पुल बाधने लगी है |
किट्टू का एक भरा-पुरा परिवार है, जिसमें- पापा-मम्मी के अलावा तीन भाई-बहन है| हाँ ! और साथ ही- दादा-दादी , चाचा-चची, मोसा -मोसी भी रहते हैं | इनमे कोई छोटा तो कोई मोटा, कुछ काले, कुछ उलझे-उलझे, कुछ सहमे-सहमे से लोग भी साथ रहते हैं | इन सभी को किट्टू की बहुत फ़िक्र लगी रहती है |
टुनटुन मोसी तो हमेशा ही किट्टू की रिश्ते की बात करती है | वह आई नहीं की, चिडो की लिस्ट ही थमा देती है | वह कहती है ," चीं- चीं, लड़की अब बड़ी हो गयी है | अब इसे घर बैठा कर रखना अच्छी बात नहीं |"
अब भला किट्टू इन बातों को सुनकर कैसे उदास न होगी | वह हमेशा टुनटुन मोसी के आने पर उदास हो जाती है | अपनी उदासी को लिए, किसी से कुछ कहे बिना, वह गाँव के पास नीम के पेढ़ में जा बैठती | किट्टू सारा वक्त वहीँ बिताती, और अपने सपनो को जवा करती रहती |
एक दिन किट्टू नीम के उसी पेढ़ में उदास बैठी थी, तो अचानक दूर देश से एक गोरैया वहाँ आकर डाल पर बैठ गया | वह किट्टू को देखे बिना ही, चीं-चीं करते हुए गाना गाने लगा | उसकी आवाज़ किट्टू को भा जाती है |वह आँख बाँध करके उसके गाने को सुनने लगी |तभी गोरैया गाना, गाना बंद कर देता है |और किट्टू को देख शरमा जाता है | गाना बंद होते ही किट्टू की आँख खुल जाती है | ये देख चिडा कहता है ," चीं-चीं, माफ़ कीजियेगा ! मैंने आपको नींद से जगा दिया |
किट्टू बड़े ही अदब से कहती है, " नहीं, नहीं ! आप ऐसे मत सोचिए | मैं तो आपका गाना सुन रही थी | बहुत सुरीली आवाज़ है आपकी ........|"
इतने में किट्टू को पीछे से किसी के बुलाने की आवाज़ सुनाई दी| उसने मूढ़ कर देखा तो उसकी बहन उसे घर चलने के लिए बोल रही थी | वह चिडे को बिना कुछ कहे वहाँ से चली जाती है |
यहाँ नीम के पेढ़ में बैठा चिडा, किट्टू को दूर तक उड़ते देखता रहता है और फिर अपने आप में खो जाता है |
दुसरे दिन जब किट्टू नीम के पेढ़ पर दुबारा आती है तो, वह देखती है कि अभी तक कल वाला चिडा उसी डाल पर बैठा हुआ है | वह हैरान रहा जाती है | और चिडे से कहती है, " अरे ! आप अभी तक यहीं पर है ? घर नहीं गाये क्या ?
चिडा बोलता है , " मैं तो हमेशा से ही यहाँ रहता हूँ | तुमने शायद कभी गौर नहीं किया |
to be continue......................Manoj Prasad
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